हिंसक पशुओं पर भगवन्नाम और संतो का प्रभाव –
मुरैना मे करह धाम नामक श्री रामानंदी संतो का एक स्थान है । वहाँ पर एक सिद्ध संत रहते जिनका नाम था श्री रामरतनदास जी महाराज । जहां वे अपनी साधना करते थे वहाँ एक पहाड़ है और ऊपर निचे दो गुफाएं है । निचे वाली गुफा में महाराज जी अपनी साधना करते थे और ऊपर वाली गुफा में एक बड़ा भारी बब्बर शेर रहता था । उस शेर का वहाँ बड़ा आतंक था, अच्छे अच्छे लोग वहाँ भटकने नहीं आते थे ।
कभी कभी वह शेर निचे वाली गुफा में महाराज जे की पीठ के पीछे आकर चुपचाप बैठ जाता और जब महाराज जी की आँख खोलकर देखते थे तब कहते थे – बच्चा ! तू जानता है की महाराज बहुत समय से नाम जप में बैठे है, उनकी पीठ के पीछे कोई सहारा नहीं है अतः आकर तकिये का काम दे रहा है, हमें आराम देकर सेवा करना चाहता है ।
श्री भक्तमाल १७ – श्री रामरतन दास जी
वैसे तो वहाँ उस स्थानपर कोई नहीं आता था परंतु कुछ भक्तलोग महाराज जी के दर्शन के लिए आया करते थे और कभी उनके लिए फल अन्न आदि लाकर देते थे । जब वे लोग महाराज जी के पास आते थे तब वह शेर जोरदार दहाड़ लगता । शेर को दहाड़ता देखकर महाराज जी कहते – देखो तुम्हारे दहाड़ने से भक्त लोग दर रहे है ,तुम जबतक बैठे रहोगे तबतक भक्त लोग यहां हमारे पास नहीं आएंगे । तुम ऐसा करो, तुम अभी ऊपर वाली गुफा में चले जाओ ।
महाराज जी की बात सुनकर वह शेर चुपचार ऊपर गुफा में चला जाता औए जब कोई नहीं होता तब पुनः महाराज जी की पीठ से लगकर संत के मुख से बैठकर नाम जप सुनता रहता । धीरे धीरे भगवान के नाम प्रभाव से वह शेर बहुत सौम्य शांत होता गया और केवल भगवत प्रसाद ग्रहण करने लगा । एक दिन श्री सीताराम जी का मधुर नाम सुनते सुनते उसने शरीर त्याग दिया ।
यह कथा “हिंसक पशुओं पर भगवन्नाम और संतो का प्रभाव” को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उजागर करती है। यह न केवल संतों की साधना-शक्ति को दर्शाती है, बल्कि भगवन्नाम की महिमा को भी सिद्ध करती है।
कथासार और गूढ़ अर्थ:
इस प्रसंग में एक बब्बर शेर, जो सामान्यतः हिंसक और भयावह माना जाता है, संत श्री रामरतनदास जी महाराज के सान्निध्य में पूर्णतः परिवर्तित हो जाता है। उसका हृदय इतना कोमल हो जाता है कि वह पीठ के पीछे बैठकर सेवा का भाव प्रकट करता है, महाराज जी के नामजप में विघ्न नहीं डालता, और निर्देश मिलने पर शांतिपूर्वक गुफा में लौट जाता है।
मुख्य संदेश:
संतों की ऊर्जा और साधना से वातावरण बदलता है:
जहाँ एक ओर साधारण मनुष्य उस शेर के भय से दूर भागते थे, वहीं एक संत के तपोबल और प्रेममयी दृष्टि ने उस हिंसक पशु को भी सेवा भाव में बदल दिया।
भगवन्नाम का चमत्कारिक प्रभाव:
नामजप की शक्ति इतनी महान है कि वह जड़-चेतन, हिंसक-अहिंसक सभी पर गहरा प्रभाव डालती है। यह शेर केवल नामजप सुनते-सुनते शांत, सौम्य और अंततः प्रभु-प्राप्ति को प्राप्त हो जाता है।
अहिंसा का परम संदेश:
जब तक आत्मा पर अज्ञान का पर्दा होता है, तब तक क्रोध, भय, हिंसा जैसे भाव हावी रहते हैं। संत और भगवान का नाम इस अज्ञान को हटाकर भीतर का परम प्रेम प्रकट कर देते हैं।
आज के युग के लिए सीख:
यदि एक बब्बर शेर भगवन्नाम से बदल सकता है, तो मानव तो सहज ही आत्मिक विकास कर सकता है।
भगवद्भक्ति और संतों का संग केवल आत्मा का ही नहीं, पूरे पर्यावरण का शुद्धिकरण कर देता है।
क्रोध, भय और हिंसा के युग में हमें नामजप, ध्यान और सच्चे संतों के सत्संग की ओर लौटना चाहिए।
यह कथा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भगवन्नाम केवल एक साधन नहीं, एक चेतन शक्ति है जो जीवन को पूर्णरूपेण रूपांतरित कर सकती है — चाहे वह पशु हो या मनुष्य।
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